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  • 14 जून 2017 को मैन बुकर फाउंडेशन द्वारा लंदन (ब्रिटेन) में ‘मैन बुकर इंटरनेशनल प्राइज’ प्रदान किया गया।
  • इस वर्ष यह प्राइज ‘ए हॉर्स वॉक्स इनटू ए बार’ (A Horse Walks into a Bar) के लेखक डेविड ग्रासमैन (इस्राइल) को प्रदान किया गया।
  • इस उपन्यास की अनुवादक जेसिका कोहेन (अमेरिका) और प्रकाशक जोनाथन केप हैं।
  • पुरस्कार की 50,000 पाउंड (41 लाख 21 हजार 200 रुपयों) की राशि का विभाजन बराबर रूप से ग्रॉसमैन और उपन्यास की अनुवादक जेसिका कोहेन में किया जाएगा.
  • इस पुरस्कार की स्थापना वर्ष 2005 में की गई थी।
  • वर्ष 2005-2015 तक यह पुरस्कार प्रत्येक दो वर्षों पर किसी जीवित उपन्यासकार को विश्व स्तर की उसकी समग्र उपलब्धियों के लिए प्रदान किया जाता था।
  • वर्ष 2016 से यह पुरस्कार प्रतिवर्ष किसी उपन्यासकार को उसके किसी उपन्यास के अंग्रेजी अनुवाद के लिए दिया जाने लगा जिसका प्रकाशन ब्रिटेन में हुआ है।
  • वर्ष 2016 का मैन बुकर इंटरनेशनल प्राइज साउथ कोरिया की हॉन-कांग को ‘द वेजेटेरियन’ (The Vegetarian) के लिए प्रदान किया गया था।
  • इसके अनुवादक डेबोराह स्मिथ थे।
  • वर्ष 2002 में मैन बुकर फाउंडेशन की स्थापना की गई थी।
  • बुकर पुरस्कार की स्थापना सन् 1969 में इंगलैंड की बुकर मैकोनल कंपनी द्वारा की गई थी। इसमें 60 हज़ार पाउण्ड की राशि विजेता लेखक को दी जाती है। इस पुरस्कार के लिए पहले उपन्यासों की एक लंबी सूची तैयार की जाती है और फिर पुरस्कार वाले दिन की शाम के भोज में पुरस्कार विजेता की घोषणा की जाती है। पहला बुकर पुरस्कार अलबानिया के उपन्यासकार इस्माइल कादरे को दिया गया था।
  • 2008 वर्ष का पुरस्कार भारतीय लेखक अरविन्द अडिग को दिया गया था। अडिग को मिलाकर कुल 5 बार यह पुरस्कार भारतीय मूल के लेखकों को मिला है (अन्य लेखक - वी एस नाइपॉल, अरुंधति राय, सलमान रश्दी और किरण देसाई) और कुल 9 पुरस्कार विजेता उपन्यास ऐसे हैं जिनका कथानक भारत या भारतीयों से प्रेरित है।
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