हिन्‍दी साहित्‍यकार जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय | Jaishankar Prasad Biography in Hindi

जयशंकर प्रसाद का जन्‍म सन् 1889 में वाराणसी में हुआ था। वें काशी वर्तमान वारणसी के प्रसिद्ध क्‍वींस कॉलेज में पढने हेतु गये थे किन्‍तु परिस्थितियां सही न होने के कारण वे आठवी से आगे नहीं पढ पाये। छायावादी काव्‍य प्रवृत्ति के प्रमुख कवियों में एक जयशंकर प्रसाद की निधन 1937 में हो गया।

जयशंकर प्रसाद
जन्‍म 30 जनवरी, 1889 वाराणसी उ०प्र०
मृत्‍यु 15 नवम्‍बर, 1937
उपनाम झारखण्‍डी, कलाधर, आधुनिक कविता के समेरू, नाटक सम्राट

महत्‍वपूर्ण रचनाएं

नाटक - चन्‍द्रगुप्‍त, ध्रुवस्‍वामिनी, स्‍कन्‍दगुप्‍त, अजातशत्रु, जनमेजय का नागयज्ञ, एक घूँट (प्रथम एकांकी है), विशाख, राज्‍यश्री, कामना, हिमाद्री तुंग शृंग से, अरूण यह मधुमय देश हमारा, करूणालय, सज्‍जन, कल्‍याणी परिणय, प्रायश्चित।

कहानी - आकाशदीप, आंधी, इन्‍द्रजाल, प्रतिध्‍वनी, छाया, ग्राम, सुनहरा सांप, सालवती, मधुवा, गुंडा, पुरस्‍कार, चूडी वाली नीरा, देवरथ, गोरा गाय, अघोडी का मोह, अनबोला, अपराधी, अमिट स्‍मृति, अशोक, उस पार का योगी, करूणा की विजय, कला, कलावती की शिक्षा, खंडहर की लिपि, गुदडी के लाल, अयोध्‍या का उद्धार, शोकोच्‍छवास, वनमिलन, बभ्रूवाहन, गुलाम, गुदड साई, घीसू, चक्रवती का स्‍तम्‍भ, चंदा, जहॉंआरा, छोटा जादूगर, तानसेन, पत्‍थर की पुकार, पाप की पराजय, सलीम, सिकंदर की शपथ, हिमालय का पथिक।

उपन्‍यास - कंकाल, तितली, इरावती (अपूर्ण उपन्‍यास)

काव्‍य - कानन-कुसुम, चित्राधार, झरना, आंसू, लहर, कामायनी, आत्‍मकथ्‍य, महाराणा का महत्‍व, प्रेम पथिक, उर्वशी (प्रथम काव्‍य), प्रेम राज्‍य

जयशंकर प्रसाद से सम्‍बन्धित महत्‍वपूर्ण तथ्‍य

  • बचपन में जयशंकर प्रसाद को झारखण्‍डी कहकर पुकारा जाता है।
  • जयशंकर प्रसाद छायावाद के चार स्‍तम्‍भों में से एक थे।
  • मात्र 9 वर्ष की उम्र में इन्‍होंने कलाधर उपनाम से ब्रजभाषा में एक सवैया लिखा।
  • चित्राधार जयशंकर प्रसाद का प्रथम काव्‍य संग्रह है तथा कानन-कुसुम खडी बोली का प्रथम काव्‍य का संग्रह है।
  • कामायनी (15 खण्‍डों) में महाकाव्‍य अक्षय कीर्ति का स्‍तम्‍भ है। यह विश्‍व का अद्वितीय ग्रन्‍थ है।
  • कामायनी को सुमित्रानन्‍दन पंत ने हिन्‍दी साहित्‍य का ताजमहल कहा है।
  • जयशंकर प्रसाद ने इन्‍दु पत्रिका का सम्‍पादन भी किया है। 
  • जयशंकर प्रसाद को आधुनिक हिन्‍दी की श्रेष्‍ठतम काव्‍य कृति  मानी जानेे वाली  कामायनी पर मंगलाप्रसाद पारितोषिक दिया गया। 
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